मेरी प्रिय बहनों,
आज मैं आपसे घर-परिवार की एक ऐसी बात करने आई
हूँ, जो हम रोज़ अपने घरों में देखते हैं, पर उस पर गहराई से सोचते नहीं।
आज हमारे परिवारों में जब कोई मनमुटाव होता है,
पति-पत्नी में
झगड़ा होता है, या बच्चे कोई गलती करते हैं, तो लोग बहुत आसानी से
ऊपर-ऊपर से ‘सॉरी’ बोल देते हैं। लेकिन आपने ध्यान दिया होगा कि उस ‘सॉरी’ के बाद
भी दिलों की दूरी कम नहीं होती। घर का तनाव वैसा ही बना रहता है। जानते हैं क्यों?
क्योंकि वह
माफ़ी सिर्फ ज़ुबान से निकली होती है, दिल से नहीं।
मेरे 'Living
Master' (ठाकुर जी) इस पर एक बहुत ही कोमल और गहरी बात समझाते हैं।
वे कहते हैं कि— "जब तुम अपनी किसी गलती या
बुरे व्यवहार के लिए अंदर से सच्चे दिल से पछतावा (अनुताप) करोगे, तभी भगवान
तुम्हें माफ़ करेंगे। और जब भगवान तुम्हें माफ़ कर देंगे, तब तुम खुद
महसूस करोगे कि तुम्हारे दिल में एक बहुत ही मीठा और पवित्र सुकून आ रहा है। उसी
पल तुम्हारा मन बिल्कुल शांत, विनम्र और आनंद से भर जाएगा।"
ठाकुर जी की यह बात कितनी सीधी और सच्ची है! जब
हम दिल से अपनी गलती मान लेते हैं, तो हमारा अहंकार पिघल जाता है और मन का सारा बोझ उतर जाता
है।
लेकिन आज हमारे घरों में क्या हो रहा है?
ठाकुर जी हमें
एक बहुत बड़ी चेतावनी देते हैं। वे कहते हैं कि— "जो इंसान मुंह
से तो माफ़ी मांग लेता है, पर कुछ समय बाद फिर से वही गलत व्यवहार या वही गलती दोहराने
लगता है, तो समझ लेना कि वह बहुत जल्द अपने जीवन में भारी दुखों और
पतन के गर्त में गिर जाएगा।"
बहनों, आज हमारे बच्चों के रिश्ते और शादियाँ क्यों टूट
रही हैं? क्योंकि रिश्तों में यह दोहरापन आ गया है। लोग गलती करते हैं, ऊपर से माफ़ी
का नाटक करते हैं, और फिर वही कड़वाहट दोहराते हैं। ठाकुर जी साफ़ कहते हैं
कि— "सिर्फ मुंह से माफ़ी मांग लेना कोई पछतावा नहीं
है, बल्कि ऐसा दिखावा तो इंसान को कभी सुधरने ही नहीं देता। जब दिल में सचमुच
पछतावा आता है, तो इंसान के चेहरे पर, उसकी आँखों में और उसके
स्वभाव में वह बदलाव अपने आप दिखने लगता है।"
हम सब अग्रवाल समाज की बहनें अपने घरों की
लक्ष्मी हैं। हमारे पूर्वज महाराजा अग्रसेन जी के सिद्धांतों में सच्चाई, सादगी और
निष्कपट व्यवहार ही सबसे बड़ा धन था। आज हमें अपने घरों को बचाने के लिए इसी
सच्चाई को वापस लाना होगा।
हमें अपने बच्चों को केवल बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ
और पैसा कमाना नहीं सिखाना है, बल्कि उन्हें यह सिखाना है कि बेटा, अगर कभी कोई गलती हो
जाए—चाहे अपनों से हो या समाज में किसी से—तो ज़ुबान से चालाकी करने के बजाय,
साफ़ दिल से
अपनी भूल स्वीकार करना सीखो।
आइए, आज से हम सब अपने घरों में एक नई शुरुआत करें। दिखावे की माफ़ी को छोड़कर,
दिलों की
कड़वाहट को साफ़ करें। जब हमारे घरों में यह सच्चाई और गुरु का यह सीधा मार्ग
अपनाया जाएगा, तो किसी भी परिवार में कभी दूरी नहीं आ पाएगी और हमारा घर
सचमुच स्वर्ग बन जाएगा।
सदैव आपकी शुभाकांक्षी,
पुष्पा बजाज
Founder and President: Agrawal Integrity Mission : AIM An initiative by
Shubham Charitable and Welfare Association - 9436302721


No comments:
Post a Comment